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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :घटती शेष की पद्धति (Reducing Balance Method) |

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घटती शेष की पद्धति (Reducing Balance Method) :

इस पद्धति में संपत्ति के प्रारंभिक शेष पर निश्चित किये गये प्रतिशत की दर से घिसाई गिनी जाती है । प्रारंभिक शेष अर्थात् पिछले वर्ष की घिसाई घटाने के बाद का अंतिम शेष ।

इस पद्धति में प्रथम वर्ष संपत्ति की लागत किंमत पर निश्चित दर से घिसाई गिनी जाती है । दूसरे वर्ष लागत किंमत में से प्रथम वर्ष की घिसाई की रकम घटाकर शेष रकम पर दूसरे वर्ष की घिसाई गिनी जाती है । इस प्रकार क्रमश: वर्ष प्रतिवर्ष संपत्ति की वर्ष की प्रारंभ की शेष पर घिसाई गिनी जाती है और संपत्ति की किंमत में से उस वर्ष की घिसाई घटायी जाती है । संपत्ति पर घिसाई की गणना हिसाबी वर्ष के अंत में की जाती है । प्रति वर्ष संपत्ति की शेष उस वर्ष की घिसाई की रकम घटाने से घटती जाती है इसलिए इस पद्धति को घटती शेष पद्धति कहते हैं ।

वार्षिक घिसाई की रकम के लिये सूत्र :

D = C × \(\frac{C−S}N \) 

जिसमें D = Depreciation = वार्षिक घिसाई

C = Cost Price = arra forma

R = Rate of Depreciation = घिसाई का दर

लाभ :

(i) घिसाई गिनने की यह सरल पद्धति है ।

(ii) इस पद्धति में मरम्मत खर्च और घिसाई की राशि के बीच संतुलन बना रहता है । कारण कि प्रारंभ के वर्षों में घिसाई अधिक और बाद के वर्षों में घिसाई घटती जाती है, जबकि मरम्मत खर्च प्रारंभ के वर्षों में कम या नहीवत होता है और जैसे-जैसे वर्ष बढ़ते है मरम्मत खर्च बढ़ता जाता है ।

(iii) इस पद्धति में संपत्ति के उपयोग दरम्यान या उपयोगी आयुष्य के अंत में उसकी किंमत शून्य नहीं होती, लगभग अंदाजित भंगार किंमत जितनी शेष रहने की अपेक्षा होती है ।

मर्यादाएँ (हानियाँ):

(i) यह पद्धति समान किस्त पद्धति की तुलना में थोड़ी कठिन है । ..

(ii) इस पद्धति में संपत्ति में लगाई गई पूँजी के ब्याज हानि संबंध में कोई व्यवस्था नहीं है ।

किन संपत्तियों के लिये अनुकूल : जिन संपत्तियों का उपयोगी आयुष्य लंबा हो, उसके लिए यह पद्धति अधिक अनुकूल रहती है ।

जैसे : यंत्र, फर्निचर, फिक्ष्चर्स वगैरह ।



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