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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :हिसाबी समय अथवा हिसाबी अवधि का ख्याल (Periodicity Concept) 

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हिसाबी समय अथवा हिसाबी अवधि का ख्याल (Periodicity Concept) : इसका दूसरा नाम हिसाबी अवधि (Accounting Period) का ख्याल भी है । यह ख्याल चालू पेढ़ी के ख्याल से जुड़ा है । चालू पेढी या सातत्य के ख्याल के अनुसार अगर व्यवसाय को गलत सूचना मिले और वह व्यवसाय लंबे समय तक चालू रहे ऐसी मान्यता स्वीकार की जाये तो व्यवसाय हानि करेगा या विसर्जित हो जायेगा । इसके अलावा व्यवसाय से जुड़े अन्य पक्षकार जैसे : लेनदार, विनियोगकर्ता, करवेरा अधिकारी वर्ग प्रत्येक वर्ष के दरम्यान के व्यवसाय की जानकारी प्राप्त करने की इच्छा रखता है । इसलिये व्यवसाय को अमुक निश्चित हिसाबी समय या अवधि में बाँट दिया जाता है । प्रत्येक हिसाबी समय के अंत में मौद्रिक (वित्तीय) पत्रकों को तैयार किया जाता है ।

हिसाबी समय सामान्यत: 12 मास का माना जाता है और हिसाबी समय के अनुसार हिसाब प्रति वर्ष के अंत में तैयार किया जाता है । 12 मास का समय इसलिये ध्यान में लिया जाता है कारण कि इस समय के दरम्यान तीनों ऋतुओं की धंधे पर होनेवाली असर ध्यान में आ जाती है । ऐसा हिसाबी वर्ष वार्षिक हिसाब के रूप में भी जाना जाता है । ऐसा हिसाबी वर्ष केलेन्डर वर्ष, संवत् वर्ष, सहकारी वर्ष या अन्य कोई भी समय हो सकता है । भारत में आयकर कानून के अनुसार प्रत्येक करदाता को प्रत्येक मौद्रिक वर्ष अर्थात् 1 अप्रेल से 31 मार्च के दिन पूरा होनेवाले 12 मास के समय की आय के विवरण की असर को दर्शाना होता है ।

भारत में सभी स्टोक एकस्टोक पर पंजीकृत तमाम कंपनीयों को त्रिमासिक मौद्रिक हिसाब तैयार करने होते है । कितनी इकाईयाँ खुद के आंतरिक उपयोग के लिये मासिक हिसाब तैयार करती है जिसका हिसाबी समय 1 मास का होता है ।

इस प्रकार, जब अमुक समय के अंतर पर हिसाब तैयार किये जाये उस समयावधि को हिसाबी समय या हिसाबी अवधि कहते हैं ।



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