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Answer» रोजमेल : देशीनामा पद्धति की मूलभूत बही यह रोजमेल है । रोजमेल प्रति रोज लिखी जाती है, और वाउचर तथा कच्ची बही पर से इसे तैयार किया जाता है । प्रतिदिन के अंत में उसकी अंतिम शेष ज्ञात की जाती है । प्रतिरोज इसे लिखे जाने से इस मेल को रोजमेल के रूप में जाना जाता है । रोजमेल संबंधी महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ (The important Points regarding ‘Rojmel’) : - रोजमेल यह दिनोंधी नामा पद्धति के रोजनामचा के स्वरूप की तरह है । इसमें नकद और उधार दोनों प्रकार के व्यवहारों को लिखा जाता है ।
- रोजमेल यह दिनोंधी नामा पद्धति के रोकड़बही जैसा स्वरुप रखता है । रोजमेल में रोकड़ खाते के सिवाय के ही खातों की असर दी जाती है । रोजमेल के द्वारा दिन के अंत में उसकी शेष ज्ञात करके केश बोक्स (गल्ले) की शेष के साथ उसे मिलाया जाता है । अर्थात् रोजमेल का उद्देश्य प्रत्येक दिन की रोकड़ शेष ज्ञात करना है ।
- रोजमेल यह रोजनामचा और रोकड़बही दोनों का मिश्र स्वरूप होने से देशीनामा में रोकड़ खाता खोलने की आवश्यकता नहीं रहती।
रोजमेल में व्यवहार लिखते समय ध्यान में रखने योग्य मुद्दे : - रोजमेल की बहीयाँ कोरी, आठ सल (मोड़) बनाई हुई, बाइन्डिंग की हुई बड़ी प्रकार की होती है ।
- प्रतिदिन का हिसाब इसमें नये पन्ने से लिखा जाता है ।
- रोजमेल के शीर्षक में सर्वप्रथम रो.पृ. दर्शाया जाता है जो यह बताता है कि रोजमेल किस पन्ने पर आया हुआ है ।
- रोजमेल के शीर्षक में मालिक का नाम, विक्रम संवत्, देशी मास, पक्ष, तिथि, तारीख और वार लिखा जाता है ।
- प्रथम चार भाग में जमा और फिर उधार के चार खाने होते है जिसमें प्रथम भाग में रकम और शेष भाग में विवरण दर्शाया जाता है ।
रोजमेल के जमा पक्ष की रकमों का योग हमेशा अधिक होता है । इसके लिये श्रीं पुरांत शेष हमेशा उधार की ही तरफ होता है ।
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