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संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :संपादन का ख्याल (Accrual Concept). |
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Answer» संपादन का ख्याल (Accrual Concept) :इस ख्याल को उपज-खर्च के संपादन के सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है । इस सिद्धांत के अनुसार यह माना जाता है कि जिस समय के दरम्यान की आवक या खर्च हो उसी समय की आवक या खर्च के रूप में उसे गिनना चाहिए, फिर चाहे उस समय में नकद प्राप्त न हुई हो या चुकायी न गयी हो । इस प्रकार, उपज या खर्च जिस समय से जुड़ी हो उस समय में उसका संपादन हुआ गिना जायेगा । इस ख्याल के अनुसार आय का संपादन हुआ तभी कहलायेगा जब वह आय की कमाई की गई हो या मिलनयोग्य हो । फिर चाहे वह रोकड़ में प्राप्त हुई हो या न हो । आय या खर्च के संपादन की दो अलग-अलग पद्धतियाँ (i) रोकड़ के आधार पर (Cash Basis) और (ii) संपादन के आधार पर (Accrual Basis) में रोकड़ के आधार पर आय तभी लिखी जाती है जब रोकड़ प्राप्त हो गई हो और खर्च तभी लिखा जायेगा जब वह वास्तव में चुकाया गया हो । अमुक प्रकार के व्यवसायी जैसे : डॉक्टर, वकील या चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट रोकड़ पद्धति के अनुसार हिसाब रखते है । जबकि कंपनियों को संपादन पद्धति के अनुसार हिसाब रखना अनिवार्य होता है । जबकि व्यापारी पेढ़ीयाँ संपादन के ख्याल के आधार पर आय या खर्च का लेखा हिसाबों में करती है । |
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