1.

संपादन का ख्याल उदाहरण सहित समझाइए ।

Answer»

संपादन का ख्याल के उदाहरण निम्न है :

(i) संपादन के सिद्धांत के आधार पर जिस समय का जो खर्च हो उसी समय ध्यान में लेना चाहिए । फरवरी, 2016 के मास का चुकाया किराया भले मार्च, 2016 में चुकाया जाये फिर भी फरवरी, 2016 के मास का ही खर्च गिना जायेगा ।

(ii) माल के विक्रय के व्यवहार में अगर पहले से रोकड़ प्राप्त हो गई हो परंतु जब तक माल की बिक्री न हो तब तक या जबतक ओर्डर के सामने माल की डिलीवरी न दी गई हो तब तक आवक संपादित नहीं गिनी जाती । अर्थात् जब तक प्राप्त होने योग्य या चुकाने योग्य व्यवहार संपूर्ण न हो जाये तब तक हिसाबों में कोई भी आवक संपादित हुई नहीं कहलायेगी ।

(iii) जब माल का उधार विक्रय किया जाये तब हिसाबों में आवक संपादित हुई गिनी जाती है, भले ही रोकड़ न मिली हो । यह माना जाता है कि जिस व्यक्ति को उधार माल बेचा गया है वह व्यक्ति करार के अनुसार कानूनी दृष्टि से इस माल के पैसे चुकाने के लिये जिम्मेदार माना जायेगा जिससे भविष्य में उससे राशि प्राप्त हो जायेगी । इस प्रकार, संपादन के ख्याल के अनुसार माल का विक्रय किया जाये तब भले ही रोकड़ मिली हो या न मिली हो परंतु विक्रय की आय प्राप्त हुई है ऐसा मान लिया जाता है ।



Discussion

No Comment Found