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संपूर्ण कविता का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। भारत महिमा​

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के आँगन में उसेप्रथम किरणों का दे उपहारउषा ने हँस अभिनंदन कियाऔर पहनाया हीरक हार।जगे हम, लगे जगाने विश्वलोक में फैला फिर आलोकव्योम–तम–पुंज हुआ तब नाशअखिल संसृति हो उठी अशोक।विमल वाणी ने वीणा लीकमल–कोमल–कर में सप्रीतसप्तस्वर सप्तसिंधु में उठेछिड़ा तब मधुर साम–संगीत।हमारे संचय में था दानअतिथि थे सदा हमारे देववचन में सत्य, हृदय में तेजप्रतिज्ञा में रहती थी टेव।वही है रक्त, वही है देशवही है साहस, वैसा ज्ञानवही है शांति, वही है शक्तिवही हम दिव्य आर्य संतान।जिये तो सदा इसी के लियेयही अभिमान रहे, यह हर्षनिछावर कर दें हम सर्वस्यहमारा प्यारा भारतवर्ष।



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