|
Answer» संयुक्त राष्ट्र संघ युद्ध को रोकने और समस्त विश्व में शान्ति बनाये रखने के उद्देश्य से 1919 में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन ‘राष्ट्र संघ’ (League of Nations) की स्थापना की गयी थी। 1939 में दूसरा विश्वयुद्ध प्रारम्भ हो जाने पर राष्ट्र की असफलता स्पष्ट हो गयी। ऐसी स्थिति में विविध अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में नवीन अन्तर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना पर विचार किया गया और ‘सेनफ्रांसिस्को सम्मेलन’ के आधार पर 24 अक्टूबर, 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई। उसी समय से संयुक्त राष्ट्र संघ अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सहयोग की दिशा में कार्य कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में है। संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र के अनुसार इस संगठन के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार हैं- ⦁ अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा बनाये रखना और इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए शान्ति विरोधी तत्त्वों का निराकरण व आक्रामक कृत्यों को दूर करना। ⦁ राष्ट्रों में मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना व विश्वशान्ति को सुदृढ़ बनाने के अन्य उपाय करना। ⦁ आर्थिक, सामाजिक और अन्य सभी अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना। ⦁ उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए विभिन्न राष्ट्रों के प्रयत्नों तथा कार्यों में मेल स्थापित करना और इस दृष्टि से एक केन्द्र के रूप में कार्य करना। सदस्यता (Membership) प्रारम्भ में ही संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 51 राज्य इसके प्रारम्भिक सदस्य हैं। घोषणा-पत्र के अनुसार उन राज्यों को भी सदस्यता प्रदान की जा सकती है, जिन्हें सुरक्षा परिषद् के 5 स्थायी सदस्यों सहित सुरक्षा परिषद् के बहुमत और साधारण सभा के 2/3 बहुमत का समर्थन प्राप्त हो। किसी देश की शान्तिप्रियता, विधान के नियमों को स्वीकार करने तथा संघ के उत्तरदायित्व को पूरा करने की समर्थता भी संघ की सदस्यता के लिए अनिवार्य है। घोषणा-पत्र के सिद्धान्त का उल्लंघन किये जाने पर सम्बन्धित राज्य को संघ से निकाला जा सकता है। संघ की सदस्य संख्या में निरन्तर वृद्धि होती रही है और वर्तमान समय में इस संगठन की सदस्य संख्या 193 हो गई है। महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि स्विट्जरलैण्डे तटस्थता की विदेशी नीति का पालन करता है तथा विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के आपसी विवादों से स्वयं को पूर्णतया अलग रखने की इच्छा के कारण उसने 2001 ई० तक संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता प्राप्त नहीं की। यदि कोई सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र के नियमों-आदेशों की लगातार अवहेलना करता है, तो सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा उसकी सदस्यता समाप्त कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य अंग और उनके कार्य संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्य 6 अंग हैं- ⦁ साधारण सभा (महासभा) (General Assembly), ⦁ सुरक्षा परिषद् (Security Council), ⦁ आर्थिक व सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council), ⦁ प्रन्यास परिषद् (Trusteeship Council), ⦁ अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice), ⦁ सचिवालय (Secretariat) इनमें से प्रत्येक के संगठन और कार्यों का संक्षिप्त वर्णन निम्न प्रकार है- 1. महासभा – संयुक्त राष्ट्र की एक महासभा होती है। सभी सदस्य-राष्ट्रों को महासभा की सदस्यता दी जाती है। प्रत्येक सदस्य राष्ट्र को इसमें अपने पाँच प्रतिनिधि भेजने का अधिकार है, किन्तु किसी भी निर्णायक मतदान के अवसर पर उन पाँचों का केवल एक ही मत माना जाता है। इस सभा का अधिवेशन वर्ष में एक बार सितम्बर माह में होता है। आवश्यकता पड़ने पर एक से अधिक बार भी अधिवेशन हो सकता है। महासभा प्रत्येक अन्तर्राष्ट्रीय विषय पर विचार कर सकती है। साधारण विषयों में बहुमत से निर्णय लिया जाता है, किन्तु विशेष विषयों के निर्णय के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता पड़ती है। सभा के कार्यों की देख-रेख के लिए एक अध्यक्ष होता है। इसकी नियुक्ति स्वयं महासभा ही करती है। यह सभा सुरक्षा परिषद् के 10 अस्थायी तथा आर्थिक व सामाजिक परिषद् के 54 सदस्यों का निर्वाचन करती है। संयुक्त राष्ट्र के बजट को स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार महासभा को ही दिया गया है। 2. सुरक्षा परिषद् – सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्र का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है। सुरक्षा परिषद् में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन, फ्रांस तथा साम्यवादी चीन इसके 5 स्थायी सदस्य हैं। 10 अस्थायी सदस्यों का चुनावों महासभा द्वारा दो वर्षों के लिए होता है। इस परिषद् का मुख्य कार्य विश्वशान्ति को प्रत्येक प्रकार से सुरक्षित रखना है। किसी भी वाद-विवाद का अन्तिम निर्णय पाँच स्थायी सदस्यों की सहमति एवं चार अस्थायी सदस्यों की सहमति के आधार पर लिया जाता है। यदि स्थायी सदस्यों में से किसी एक सदस्य की किसी विषय पर अस्वीकृति हो जाती है, तो वह निर्णय रद्द हो जाता है। स्थायी सदस्यों के इस अधिकार को ‘निषेधाधिकार’ (Veto Power) कहते हैं। इस परिषद् को विश्व में शान्ति स्थापना करने के लिए असीम अधिकार प्राप्त हैं। इस परिषद् ने अपने इन अधिकारों का अनेक अवसरों पर सदुपयोग भी किया है। इसे आवश्यकतानुसार अपनी सैन्य शक्ति के प्रयोग करने का भी अधिकार प्राप्त है। सुरक्षा परिषद् के प्रमुख कार्य – सुरक्षा परिषद् के प्रमुख कार्य निम्नवत् हैं- ⦁ अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा स्थापित करना। ⦁ अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष और विवाद के कारणों की जाँच करना और उसके निराकरण के शान्तिपूर्ण समाधान के उपाय खोजना। ⦁ युद्धविराम लागू करने के लिए आर्थिक सहायता को रोकना और सैन्य शक्ति का प्रयोग करना। ⦁ महासभा को नए सदस्यों के सम्बन्ध में सुझाव देना। ⦁ अपनी वार्षिक तथा अन्य रिपोर्ट महासभा को भेजना। 3. आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् – परिषद् के इस अंग की स्थापना का उद्देश्य आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े हुए राष्ट्रों को आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति के लिए सहायता देना है। इसके 54 सदस्यों का कार्य अन्तर्राष्ट्रीय अर्थ, समाज, स्वास्थ्य तथा शिक्षा एवं संस्कृति आदि से सम्बन्धित समस्याओं का अध्ययन कर इनके समाधान हेतु योजना बनाना होता है। 4. प्रन्यास परिषद् – इस परिषद् का मुख्य लक्ष्य विश्व में पराधीन एवं पिछड़े हुए देशों की सुरक्षा व देखभाल करना है। इस परिषद् के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं- ⦁ सुरक्षित प्रदेश के सभी महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार करना। ⦁ संरक्षित क्षेत्रों की जनता के आवेदन-पत्रों पर विचार करना। ⦁ संरक्षित क्षेत्रों के स्थलों का घटनास्थल पर जाकर स्वयं निरीक्षण करना। माइक्रोनेशिया तथा पलाऊ राज्यों के सार्वभौमिक राष्ट्र बन जाने के बाद ट्रस्टीशिप काउंसिल के अन्तर्गत अब कोई राज्य नहीं है। यद्यपि अब भी माइक्रोनेशिया की सुरक्षा का भार संयुक्त राज्य अमेरिका पर ही है। 5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय – यह संयुक्त राष्ट्र को न्यायालय है। इसमें 15 न्यायाधीश हैं, जिनका चुनाव सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा द्वारा होता है। इस न्यायालय का कार्य अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार सदस्य राष्ट्रों के कानूनी विवादों को निपटाना है। यह अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय हेग (नीदरलैण्ड) में स्थित है। 6. सचिवालय – यह संयुक्त राष्ट्र का प्रधान कार्यालय है। इसका प्रमुख सेक्रेटरी जनरल होता है। इसे महासचिव भी कहते हैं। इसके अधीन लगभग 10 हजार छोटे-बड़े अधिकारियों का एक वर्ग है। इसकी नियुक्ति सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा करती है। महासचिव का कार्य संयुक्त राष्ट्र के कार्यों की रिपोर्ट तैयार कर प्रतिवर्ष महासभा के सम्मुख प्रस्तुत करना होता है। इसके अतिरिक्त शान्ति एवं सुरक्षा के भंग होने की आशंका से सम्बन्धित आशय की सूचना महासचिव सुरक्षा परिषद् को देता है।
|