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सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन-परिचय देते हुए स्वतन्त्रता आन्दोलन में उनका योगदान लिखिए। |
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Answer» जीवन परिचय-सरदार वल्लभभाई पटेल को लौह-पुरुष के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म 21 अक्टूबर, 1875 ई० को गुजरात के एक धनी परिवार में हुआ था। ये एक प्रतिष्ठित वकील थे। सन् 1918 ई० में गांधी जी द्वारा चलाये गये किसान आन्दोलन में ये उनके साथ मिल गये। सन् 1918-19 ई० से पटेल पूर्णत: कांग्रेस के साथ जुड़ गये और सन् 1927 ई० के स्वतन्त्रता संग्राम में अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया। स्वतन्त्र भारत के ये प्रथम उपप्रधानमन्त्री बने। 15 दिसम्बर, 1950 ई० को आपका निधन हो गया। स्वतन्त्रता आन्दोलन में योगदान बारदोली सत्याग्रह – सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम बारदोली सत्याग्रह से जुड़ा हुआ है। महात्मा गांधी के कहने पर पटेल ने बारदोली के किसानों के सत्याग्रह का आयोजन किया। किसानों ने सत्याग्रह इसलिए किया, क्योंकि सरकार ने लगान बहुत बढ़ा दिया था। सत्याग्रह के दौरान किसानों को बहुत-सी यातनाएँ सहनी पड़ीं। उनकी फसलें नीलाम कर दी गयीं। उनके मवेशियों को सरकार उठाकर ले गयी और बेच डाला। परन्तु सरदार पटेल के नेतृत्व में किसान सत्याग्रह पर डटे रहे। अन्त में सरकार को उनकी माँगें माननी पड़ी। रियासतों का भारत संघ में विलय – रियासतों के भारत में विलय के बिना सरदार पटेल भारत की स्वतन्त्रता को अधूरा समझते थे। अपने विशाल हृदय, दूरदर्शिता और उदारता परन्तु कठोर निर्णय-शक्ति का उपयोग करते हुए इन्होंने प्रत्येक बाधा को दूर किया। पहले रक्षा, विदेश मामलों और संचार के विषयों में देशी रियासतों को सम्मिलित किया, फिर उनका संगठन करके अन्त में पूरी तरह से केन्द्र में विलय करके समस्त देश को विधान की दृष्टि से एक बना दिया। सरदार पटेल ने रियासती विभाग के अन्तर्गत एक उपसमिति का गठन भी किया। इनके सुझाव पर रियासती मन्त्रालय बनाया गया और वे स्वयं उसके अध्यक्ष हुए। सरदार पटेल के प्रयत्नों का यह परिणाम हुआ कि 15 अगस्त, 1947 ई० तक जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर को छोड़कर सभी रियासतें भारतीय संघ में सम्मिलित हो गयीं। फरवरी, 1948 ई० में एक रेफरेण्डम के द्वारा जूनागढ़ का विलय 20 जनवरी, 1949 ई० को काठियावाड़ के संयुक्त राज्य में हो गया। हैदराबाद के विलय को सुनिश्चित करने के लिए सरदार पटेल ने पुलिस कार्रवाई करने का निश्चय किया। पुलिस कार्रवाई 13 सितम्बर, 1948 ई० को शुरू हुई और तीन दिन के भीतर निजाम ने हथियार डाल दिये। 1 नवम्बर, 1948 ई० को हैदराबाद भारतीय संघ में सम्मिलित हो गया। जब कबायली लोग, जिन्हें पाकिस्तान मदद दे रहा था, श्रीनगर पर कब्जा करने वाले थे, तब महाराजा कश्मीर ने भारत सरकार से सहायता माँगी और 26 अक्टूबर, 1947 ई० को भारत संघ में विलय के प्रवेश पत्र पर हस्ताक्षर कर दिये। |
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