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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:“कहाँ जन्म है तेरा?” मैंने पूछा जब प्रतिभा से,“महलों में? गुलगुले गलीचों पर? गुलाब की क्यारी में?वृद्धों की चिंता में? बच्चों की दंतहीन किलकारी में?बोलो तुम रहती कहाँ? जानने को हम सब हैं कितने प्यासे!”

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प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘प्रतिभा का मूल बिन्दु’ नामक कविता से ली गई हैं जिसके रचयिता डॉ. प्रभाकर माच्चे हैं।
संदर्भ : कवि सतत प्रयास तथा परिश्रम से जन्म लेनेवाली ‘प्रतिभा’ के मूल को प्रश्नों के द्वारा जानने की उत्सुकता प्रकट करता है।
स्पष्टीकरण : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि माचवेजी “प्रतिभा के मूल को जानने कि इच्छा से, उसके जन्म स्थान के बारे में स्वयं प्रतिभा से ही प्रश्न करते हैं कि वह महलों में, फूलोवाले गलिचों पर, गुलाब की क्यारियों में, वृद्धों की चिंतनशीलता का अनुभव में, बच्चों कि मुग्धता में, कहाँ पैदा होती है। कवि ‘प्रतिभा’ के मूल की सैद्धांतिक समीक्षा का प्रयास इन पंक्तियों द्वारा करता है।



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