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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:मैं हूँ प्रेममयी, जग दिखतामुझे प्रेम का पारावार।भरा प्रेम से मेरा जीवन,लुटा रहा है निर्मल प्यार॥ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘उल्लास’ नामक कविता से ली गई हैं जिसकी रचयिता कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान हैं। |
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