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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :परम पुनीत नीर कावेरी, मस्तक धर कर्नाटक में।पम्प महकवि के दर्शन, कर लो चलकर कर्नाटक में॥बसवेश्वर या अक्कमहादेवी कर्नाटक में गाते।रामानुज आचार्य ‘मेलकोटे’ में दर्शन दे जाते॥

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प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘भारत की धरती’ नामक आधुनिक कविता से लिया गया है, जिसके रचयिता डॉ. पुण्यमचन्द ‘मानव’ हैं।

संदर्भ : भारत देश की महानता एवं उसमें कर्नाटक प्रांत की विशेषता का वर्णन इसमें देखने को मिलता है।

भाव स्पष्टीकरण : कर्नाटक प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है जिसकी अपनी विशेषता है। यहाँ परम पवित्र नदी माता कावेरी पूरे प्रदेश को पानी देते हुए प्रवाहित है। ‘पम्प रामायण’ इस प्रांत की अनुपम रचना है जिसे पम्प महाकवि ने लिखा और सबको ज्ञान प्रदान कर रहा है। महात्मा बसवेश्वर का ‘कायक’ सिद्धान्त एवं अक्कमहादेवी का निष्कल्मष भक्ति सिद्धान्त यहीं पर मिलते हैं। ‘विशिष्टाद्वैत सिद्धान्त’ के जनक श्री रामानुजाचार्य कर्नाटक के मेलकोटे में दर्शन देते हैं। इस प्रकार धर्म, कला एवं संस्कृति का आराधना केन्द्र है कर्नाटक प्रदेश।

विशेष : कर्नाटक की महत्ता का वर्णन इसमें हुआ है।



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