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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिएःजन्मों के जीवन मृत्यु मीत! मेरी हारों की मधुर जीत!झुक रहा तुम्हारे स्वागत में मन का मन शिर का शिर विनीत। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘तुम आओ मन के मुग्ध मीत’ नामक कविता से ली गई हैं जिसके रचयिता डॉ. सरगु कृष्णमूर्ति हैं। |
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