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स्थितिदर्शक पत्रक या निवेदन अर्थात् क्या ? 

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आर्थिक चिट्टे की तरह तैयार किये जानेवाले इस पत्रक में व्यवसाय का मालिक वर्ष के अंत में लाभ या हानि ज्ञात करने के लिये प्रारंभ की पूँजी और अंतिम पूँजी की तुलना करते है और यदि अंतिम पूँजी में वृद्धि हुई हो तब अंतर लाभ और कमी हई हो तब अंतर हानि गिना जाता है । प्रारंभ की पूँजी न दी गई हो तब प्रारंभ का स्थितिदर्शक पत्रक या अंतिम पूँजी न दी गई हो तब अंतिम का स्थितिदर्शक पत्रक तैयार किया जाने से इस पद्धति को स्थितिदर्शक निवेदनपत्रक की पद्धति कहते हैं ।



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