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“स्त्री गालियाँ सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मैके की निंदा उनसे नहीं सही जाती।”

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प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं।

संदर्भ : इस वाक्य में लेखक प्रेमचंद आनंदी के बारे में टिप्पणी करते हुए पाठकों को उसके चरित्र का परिचय करा रहे हैं।

स्पष्टीकरण : दाल में घी न डालने से तथा घी खत्म हो जाने से लालबिहारी ने गुस्से में भला-बुरा कहा और मायकेवालों के बारे में खरी-खोटी बातें सुनायी। इसी से आनंदी को गुस्सा आ गया। क्योंकि स्त्रियाँ सब कुछ सह सकती है, मार भी खा सकती हैं, पर मायके की निंदा नहीं सह सकती।



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