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सुभद्रा जी ने अपने बचपन पर क्या आरोप लगाया और क्यों?

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युवावस्था के अपरिचित अनुभव सुभद्रा जी के लिए पहेली जैसे लगते थे। जब यह पहेली हल हुई तो उन्हें ज्ञात हुआ कि वह अब जवान हो चुकी थी। जवानी के साथ-साथ नई-नई उलझनें, चुनौतियाँ और झंझट भी उन्हें सताने लगे। उन्हें लगा कि बचपन ने उन्हें जवानी को सौंप कर उनको ठग लिया है। सुख के साम्राज्य के बदले यह संघर्षमयी जवानी मुझे दे दी है।



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