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Answer» सुनन्दा का चरित्र-चित्रण श्री विष्णु प्रभाकर द्वारा रचित ‘कुहासा और किरण’ नाटक की सुनन्दा प्रमुख नारी-पात्र है। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं (1) भ्रष्टाचार की विरोधी नवयुवतियों की प्रतिनिधि–वह उन नवयुवतियों का प्रतिनिधित्व करती है, जो जागरूक एवं सजग हैं। सुनन्दा दूरदर्शी, साहसी, चतुर, विनोदी, कर्तव्यपरायणा एवं देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए संकल्पबद्ध एक सहयोगी तथा कर्मशीला नवयुवती है। उसे अमूल्य से सहानुभूति है तथा वह समाज के पाखण्डियों के रहस्य खोलने में अन्त तक अमूल्य का साथ देती है। मुखौटाधारी भ्रष्टाचारियों से वह कहती है-“मैं पुकार-पुकार कर कहूंगी कि आप सब भ्रष्ट हैं, नीच हैं, देशद्रोही हैं। आज नहीं तो कल आपको समाज के सामने जवाब देना होगा।” (2) जागरूक नवयुवती–सुनन्दा, कृष्ण चेतन्य की सेक्रेटरी है। उसकी आयु 25 वर्ष है। वह जागरूक नवयुवती है और समाचार-पत्रों के महत्त्व तथा उसमें निहित शक्ति को पहचानती है। उसी के शब्दों में– ‘शक्ति-संचालन का सूत्र जितना समाचार-पत्रों के हाथ में है, उतना और किसी के नहीं।” (3) वाक्पटु–सुनन्दा की वाक्पटुता देखते ही बनती है। वह उमेशचन्द्र और कृष्ण चैतन्य की मिली- भगत से परिचित है। उसकी व्यंग्यपूर्ण वाक्पटुता देखिए–“आकाश जैसे पृथ्वी को आवृत्त किये है, वैसे ही आप उनको (कृष्ण चैतन्य को) आवृत्त किये हैं। आकाश के कारण ही पृथ्वी अन्नपूर्णा होती है।” (4) देशद्रोहियों की प्रबल विरोधी-स्वच्छ मुखौटाधारी देशद्रोहियों को सुनन्दा प्रबल विरोध करती है। वह विपिन बिहारी को भी खरी-खोटी सुनाती है। वह उससे कृष्ण चैतन्य के विषय में स्पष्ट कहती है—“क्या आपको अब भी पता नहीं कि कृष्ण चैतन्य वह नहीं हैं जो दिखाई देते हैं। वह मुखौटा लगाये एक देशद्रोही हैं।” (5) मुखौटाधारियों की विरोधिनी–अवसर आने पर सुनन्दा मुखौटाधारियों का प्रबल विरोध करती है। यहाँ तक कि वह चाहती है कि गायत्री द्वारा लिखा गया पत्र पुलिस के हवाले कर दिया जाए, क्योंकि पत्र पुलिस के हाथ में पहुँचने पर कृष्ण चैतन्य की परेशानी बढ़ सकती थी। वह उमेशचन्द्र अग्रवाल को लक्ष्य कर कहती है—“मुझे घिनौने चेहरों से सख्त नफरत है। गायत्री माँ के बलिदान के पीछे जो उदात्त भावना है, वह जनता तक पहुँचनी ही चाहिए।” (6) सहृदयी-सुनन्दा के हृदय में अमूल्य के प्रति सहानुभूति है। वह उसकी विवशता को समझती है। जब अमूल्य झूठी चोरी के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया जाता है, तब वह अन्याय से जूझने के लिए तत्पर हो जाती है। | इस प्रकार सुनन्दा एक प्रगतिशील, व्यवहारकुशल व स्वदेश-प्रेमी नवयुवती के रूप में पाठकों पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ती है।
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