| 1. |
सूरजमुखी की फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में वर्णन कीजिए। |
|
Answer» कीट नियन्त्रण : सूरजमुखी में कभी-कभी दीमक, हरे फुदके तथा चना के फली बेधक का प्रकोप होता है। दीमक के नियन्त्रण के लिए क्लोरपायरीफास दवा वोने के समय खेत में मिला देना चाहिए। हरे फुदके पत्तियों का रस चूस कर नुकसान पहुँचाते हैं। इनके नियन्त्रण के लिए एजाडिरेक्टिन 0.15 ई.सी की । लीटर मात्रा 600-800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए। चना के फली वेधक की सूड़ियाँ मुण्डक के दानों को खा जाती हैं। इनकी रोकथाम के लिए क्विनालफास 25 ई.सी. की 2 ली. मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। रोग नित्रन्त्रण- खरीफ ऋतु वाली फसल में फफूदजनित अंगमारी का प्रकोप अधिक होता है। डाइथेन एक-45 की 2.5 किग्रा मात्रा को 800-1000 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 दिनों के अन्तर पर दो या तीन सप्ताह बाद छिड़काव करना चाहिए। |
|