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सूरत के अधिवेशन में कांग्रेस में फूट क्यों हो गई ? दोनों गुटों के एक-एक नेता का नाम लिखिए।यासूरत के अधिवेशन में इण्डियन नेशनल कांग्रेस किन दो दलों में विभाजित हो गई और क्यों? दोनों दलों में से प्रत्येक के एक-एक नेता का नाम लिखिए। |
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Answer» ब्रिटिश सरकार के प्रति चलने वाले राष्ट्रीय आन्दोलन में उदारवादियों और उग्रवादियों के मतभेद चरम सीमा पर पहुँच गये। दोनों ही दलों के आन्दोलन के तरीके भिन्न-भिन्न थे। उग्र राष्ट्रवादी, स्वदेशी तथा बहिष्कार आन्दोलन को देशव्यापी बनाने के लिए कांग्रेस पर अपना आधिपत्य जमाना चाहते थे। इन्हीं परिस्थितियों में 1907 ई० में सूरत में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमें दोनों दलों की शक्तियों का परीक्षण हुआ। सूरत अधिवेशन में नरम दल ने अध्यक्ष पद के लिए डॉ० रासबिहारी घोष तथा उग्र राष्ट्रवादियों ने लाला लाजपत राय का नाम प्रस्तावित किया। उस समय नरम दल बहुमत में था। इस प्रकार 1907 ई० में सूरत का कांग्रेस अधिवेशन (जो गोखले का गढ़ था) उदारवादियों और उग्र राष्ट्रवादियों के मध्य रणस्थल बन गया। इस अधिवेशन में दोनों दिन अव्यवस्था बनी रही और पुलिस बुलानी पड़ी। परिणामस्वरूप कांग्रेस का औपचारिक रूप से विभाजन हो गया। उग्र राष्ट्रवादी एक संवैधानिक संशोधन द्वारा कांग्रेस से निष्कासित कर दिए गए। सूरत में कांग्रेस विभाजन के पश्चात् ब्रिटिश सरकार का उग्र राष्ट्रवादियों के विरुद्ध आतंक का ताण्डव शुरू हो गया। सरदार अजीत सिंह और लाला लाजपत राय को देश निकाला दे दिया गया। तिलक को बर्मा में माण्डले भेज दिया गया। विपिनचन्द्र पाल को जेल में बन्द कर दिया गया। उनका अपराध यह था कि उन्होंने अरविन्द घोष के विरुद्ध चलाये गये मुकदमे में उन्हें बचाने का प्रयास किया था। ब्रिटिश सरकार ने अलीपुर बम काण्ड (1908 ई०) के सम्बन्ध में अरविन्द घोष और उनके भाई वारिन्द्र घोष सहित बड़ी संख्या में क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों के मुकदमे को ‘अलीपुर बम काण्ड’ कहा जाता है। अधिकांश अभियुक्तों को दोषी पाया गया और उनमें से वारिन्द्र सहित कुछ को आजीवन कारावास दिया गया। |
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