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Answer» ‘स्वराज्य की नींव’ के एकांकीकार श्री विष्णु प्रभाकर जी हैं। इनका जन्म सन् 1912 में हुआ। भारत सरकार ने इन्हें “पद्म भूषण” सम्मान से सम्मानित किया है। - प्रस्तुत एकांकी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित है। इसमें महारानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा है। जिन्होंने स्वराज्य की नींव डाली।
- वीरांगना लक्ष्मीबाई एक साहसी, कर्मपरायण, देश प्रेमी नारी थी। उसने अंग्रेजों की नींद हराम कर दी थी।
- वह अंग्रेजों की कूट नीति को सफ़ल नहीं होने दे रही थी। वह नूपुरों की झंकार की अपेक्षा तोपों की गर्जना सुनना चाहती थी।
- उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया था कि आवश्यकता पड़ने पर अबला भी सबला बन सकती है।
- अंग्रेजी, झाँसी, कालपी, ग्वालियर आदि राज्यों को हस्तगत कर लेना चाहते थे। लेकिन रानी
लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया। राज्य में ऊँच – नीच और छुआछूत की भावनाओं को मिटाना, सेवा, तपस्या बलिदान से स्वराज्य प्राप्त करने के हर संभव प्रयास किये। - राज्य में अनुशासन युक्त सेना तैयार की। साथ ही आवश्यक योजनाएँ बनाकर अमल में लाया। युद्ध के लिए आवश्यक सामग्री संचित की। ।
- अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध करते हुये वीरगति को प्राप्त कर ली।
- इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वीरांगना लक्ष्मीबाई देशभक्ति की एक अद्भुत मिसाल थी और यह सिद्ध किया कि लक्ष्मीबाई ने सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता की नींव रखी थी।
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