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‘स्वराज्य की नींव’ शीर्षक कहाँ तक सार्थक है? प्रस्तुत एकांकी के लिए कोई अन्य शीर्षक दीजिए।

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सन् 1857 का सैनिक विद्रोह भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है। उसमें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, जूही, मुंदर, तात्या टोपे, रामचन्द्र तथा रघुनाथराव आदि ने अपनी अनोखी देशभक्ति का परिचय दिया था। ये सब अपना बलिदान देकर स्वराज्य की नींव के पत्थर बन गए। बाद में इस एकांकी के पात्रों के न्याय, तपस्या और बलिदान की नींव पर ही भारत की आजादी की इमारत खड़ी हुई। इसलिए इस एकांकी का शीर्षक “स्वराज्य की नींव’ बिलकुल सार्थक है। इसके अन्य शीर्षक ये हो सकते हैं – ‘स्वराज्य की आधारशिला’ और ‘आजादी के वे परवाने’।



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