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स्वराज्य प्राप्ति से बढ़कर है स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार करना, स्वराज्य की नींव का पत्थर बनना।

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इस वाक्य को झाँसी रानी लक्ष्मीबाई की कर्नल जूही लक्ष्मीबाई से कहती है। स्वराज्य प्राप्ति से बढ़कर है स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार करना, स्वराज्य की नींव का पत्थर बनना। इसका आशय यह है कि स्वराज्य के लिए सेना को तैयार करना, उन्हें प्रशिक्षण देना, तलवार, बंदूकें आदि शास्त्रों को इकट्ठा करना, अश्वबल को तैयार करना, स्वराज्य तथा स्वतंत्रता भावनाओं को जनता में व्याप्त करना आदि हैं।



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