Saved Bookmarks
| 1. |
तब मैं रथ का टूटा हुआ पहिया उसके हाथों में ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ।इन पंक्तियों में चर्चित पौराणिक संदर्भ वर्तमान परिवेश में कहाँ तक प्रासंगिक है? |
|
Answer» जब सारा संसार किसी साहसी मनुष्य की आवाज़ को दबाने का प्रयास करेगा, तब मैं रथ का टूटा पहिया उसके हाथों में रहकर शत्रुओं के ब्रह्मास्त्रों का सामना कर सकता हूँ। टूटा पहिया उपेक्षित मानव का प्रतीक है। आजकल समाज में असत्य और अन्याय का बोलबाला है। इन असत्यों और अन्यायों के खिलाफ अगर कोई लड़ेगा तो कोई लघु मानव ही उसका सहारा बनेगा। यही इन पंक्तियों की प्रासंगिकता है। |
|