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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है जिसके कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी हैं। संदर्भ : प्रस्तुत वाक्य आनंदी लालबिहारी सिंह से कहती है जब लालबिहारी घर छोड़कर जा रहा होता है। स्पष्टीकरण : लालबिहारी ने देखा कि भैया उस पर क्रोधित हो गए हैं और वे यह सौगन्ध खा चुके हैं कि अब वे लालबिहारी का मुँह तक नहीं देखना चाहते। तब लालबिहारी को भारी ग्लानि हो आती है। वह अपनी भाभी से क्षमा माँगते हुए कहता है- ‘भाभी, भैया से मेरा प्रणाम कह दो। वह मेरा मुँह नहीं देखना चाहते।’ इतना कहकर लौट पड़ा। आनंदी आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लेती है और कहती है ‘तुम्हें मेरी सौगंध, अब एक पग भी आगे न बढ़ाना।'
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