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तोता और इन्द्र का संवाद अपने शब्दों में लिखिए । |
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Answer» इन्द्र : अरे भाई तोते! इस वन में एक-से-एक हरे-भरे पेड़ भरे पड़े हैं। आश्चर्य है, तुम इस सूखे पेड़ के इस खोखले में अपरिचित जैसे और अनाड़ियों की भांति पड़े हुए हो। यह मूर्खता नहीं तो और क्या है? तोता : महाराज! यह पेड़ आज सूख गया है, पर पहले वह बहुत हरा-भरा और सुंदर था। पूरे वन में यह अपने ढंग का अकेला और सबसे अच्छा पेड़ था। यह इस वन की शोभा था। विभिन्न प्रकार की चिड़ियाँ, कोयल, तोते, मैना आदि सबको यह पेड़ बहुत प्यारा था। मेरा जन्म इसी हरे-भरे पेड़ पर हुआ था। इसलिए मुझे इसकी डाली-डाली बहुत प्यारी है। इसी की छाया में मैंने अपना जीवन आरंभ किया था। इसी पर मैंने बोलना, चहकना और उड़ना सीखा था। इसने मुझे बचपन से लेकर अब तक शीतल छाया दी है। यह मेरे सुख-दुःख का सच्चा साथी रहा है। लेकिन आज यह पेड़ सूख रहा है। इसका एक कारण है। एक बार वन में एक शिकारी आया था। उसने अपने विष से बुझा बाण इस पेड़ पर चला दिया था। तब से यह पेड़ विष के प्रभाव से दिन-प्रतिदिन सूखता जा रहा है। यह पेड़ मेरा बचपन का साथी है। इसी पेड़ पर रहकर मुझे सुख, संतोष और शांति मिलती है। इसे छोड़कर मैं कहाँ जा सकता हूँ? लगता है इसके साथ-साथ मेरा भी अंतिम क्षण होगा। इन्द्र : ओह! तो यह बात है! तोते, मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। अब तेरा जीवन सफल हो जाएगा। तुम मुझसे जो भी चाहो, मांग लो, मैं इसी क्षण उसे पूरा कर दूंगा। तोता : हे देवपति! यह पेड़ सारे वन की शोभा है। आप इस पेड़ को हरा-भरा कर दीजिए। इन्द्र : एवमस्तु! |
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