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टूटा पहिया’ कविता पर टिप्पणी लिखें। |
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Answer» लघु न दीजिए डाल… डॉ. धर्मवीर भारती हिंदी की प्रयोगवादी काव्य धारा के नए कवियों में अग्रणी थे। ‘टूटा पहिया’ भारती जी की एक छोटी कविता है। यह रचना भारती जी के ‘सात गीत वर्ष’ से चुनी गई है। टूटा पहिया लघु और उपेक्षित मानव का प्रतीक है, जिसे बेकार समझकर फेंक दिया गया है। नया कवि उसकी संभावनाओं को पहचानता है और उसकी क्षमताओं का मूल्यांकन करता है। इसमें ‘मैं’ सर्वनाम का प्रयोग है। टूटा पहिया कहता है कि मैं टूटा हुआ हूँ। लेकिन मुझे मत फेंको। कौन जाने कि इस दुरूह चक्रव्यूह में अभिमन्यु जैसे कोई साहसी वी घिर जाए और बड़ेबड़े महारथी उस साहसी वीर की निहत्थी आवाज़ को कुचल देना चाहे। जब सारा संसार उस साहसी मनुष्य की अकेली आवाज़ को दबाना चाहेगा, तब मैं रथ का टूटा हुआ पहिया उसके हाथों में लगकर शत्रुओं के ब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ। मुझे टूटा हुआ मानकर फेंको मत। क्योंकिक्यों इतिहास की सामूहिक गति जब झूठी झू पड़ जाएगी तो शायद टूटा पहिया ही अकेले का आश्रय बनेगा। टूटा पहिया’ एक प्रतीकात्मक रचना है। इस प्रतीक को कवि ने महाभारत के कथानक से लिया है। अभिमन्यु अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में अकेले ही प्रवेश किया। कौरवसेना के महारथियों ने उसे घेर कर उसके सब शस्त्रास्त्र नष्ट कर डाले। उसने रथ के टूटे पहिए को अस्त्र बनाकर शत्रुओं का सामना किया। कवि ने इसी घटना के आधार पर यह प्रतीकर ग्रहण किया है। समाज जब न्याय और सत्य के रास्ते से हटकर असत्य के मार्ग पर बढ़ना चाहेगा, तब उसका विरोध करनेवाला व्यक्ति अभिमन्यु के समान अपने को चक्रव्यूह में घिरा पाएगा। उस समय उसके लिए लघु और निस्सार समझे जानेवाला कोई आदमी सहायक बनेगा। टूटा पहिया जैसा लघु मानव की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, यही इस कविता का संदेश है। |
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