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टूटे पहिए से कवि क्या आशा करते हैं?

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आजकल समाज में असत्य और अन्याय का बोलबाला है। इन असत्यों और अन्यायों के खिलाफ अगर कोई लड़ेगा तो कोई टूटा पहिया यानी लघु मानव ही उसका सहारा बने। यही कवि की आशा है।



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