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तुलसीदास को भोजन में वर्षों पूर्व का स्वाद क्यों मिल रहा था?

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जिसके प्रति लगाव होता है, मोह होता है उसकी प्रत्येक वस्तु प्रिय लगती है। रत्नावली के प्रति तुलसीदास का आकर्षण था, इस कारण उसके द्वारा बनाई हुई हर वस्तु स्वादिष्ट तो लगनी ही थी। आज का भोजन रत्नावली के हाथ का बना हुआ था। इस कारण उन्हें पूर्व के स्वाद का अनुभव होने लगा। उनके प्रह्लाद घाट जाने पर भोजन का स्वाद भी चला गया। भोजन के समय उन्हें अपनी थाली के हर व्यंजन में रत्नावली के हाथ का स्पर्श अनुभव होता था। वे थाली के सामने बैठकर बार-बार रत्नावली की छवि के साथ अपने मन में बँध जाते थे। इस कारण उन्हें वर्षों पूर्व रत्नावली के हाथ के बने भोजन के स्वाद का अनुभव हो रहा था।



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