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तुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो – जेठू का यह कथन रचना संसार के किस सत्य को उद्घाटित करता है? |
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Answer» ुम दूसरी आशापूर्णा देवी बन सकती हो – जेठू का यह कथन रचना संसार के विषम परिस्थितियों पर विजय पाना और प्रोत्साहन रचनात्मक को उभार सकता है के सत्य को उद्घाटित करता है।इस कथन का आशय यह है कि मनुष्य चाहे तो जीवन की कठिन परिस्थितियाँ भी उसके आड़े नहीं आ सकती है। आशापूर्णा देवी भी आम गृहणी थी। सारा दिन कामकाज में व्यस्त रहने के बावजूद भी लेखन के लिए समय निकाल ही लेती थी। जिस किसी में भी लेखन के प्रति रूचि है उसे यदि उचित समय पर प्रोत्साहित किया जाय तो वह अच्छा लेखन कर सकता है। |
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