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तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए कविता का भावार्थ लिखें। |
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Answer» 1) तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए। कवि ‘बच्चन’ जी कहते हैं कि – पाठकों! तुम मेरा गीत गा दो, वह अमर हो जायेगा। मैंने अपने ये गीत वर्ण, चरण आदि को सजाकर बनाये हैं। मेरे ये गीत गूंज-गूंजकर मिटनेवाले गीत हैं। कोयल को मीठी तान मानो गगन तक पहुंच गई है। तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए। शब्दार्थ :
2) जब-जब जग ने कर फैलाये जब भी जग ने हाथ फैलाए मैंने यह कोष लुटाया। अपना सब कुछ देकर मैं रंक बन गया। जगती ने क्या पाया? मेरे पास भेंट हेतु कुछ नहीं, फिर भी तुम पा लो। मेरा दिया हुआ दान भी अमर हो जाए। तुम गा दो, मेरा गीत अमर हो जाए। शब्दार्थ :
3) सुन्दर और असुन्दर जग में सुन्दर और असुन्दर जग में मैंने क्या न सराहा, अनचाहे ममता दी, देखू अब किसकी इच्छा मेरे लिए रुकती है! तुम मेरा मान रख लो। तुम गा दो, मेरा गीत अमर हो जाए। शब्दार्थ :
4) दुःख से जीवन बीता फिर भी दुःख से जीवन बीता, फिर भी जीवन की अंतिम घड़ियों तक तुमसे कहता हूँ – सुख की एक साँस पर अमरत्व न्योछावर है, तुम छू दो मेरा प्राण, अमर हो जाए! तुम गा दो, मेरा गान अमर हो जाए। |
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