1.

तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझे मगर देख मोहब्बत में शामिल कोई दूसरा ना होकिस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही हैतड़पकर यह मुझे दर्द दे रही हैदिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं कियाफिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही हैमरे तो लाखों होंगे तुझपर मैं तो तेरे साथ जीना चाहता हूँ ​

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kya bate ha KITNA ACHA LIKHA ha



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