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उदारवादियों की दो उपलब्धियों की व्याख्या कीजिए।

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उदारवादियों की दो उपलब्धियाँ निम्नवत् हैं|

(i) भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन का आधार तैयार करना- यद्यपि उदारवादियों को प्रत्यक्ष रूप से कोई सफलता प्राप्त न हो सकी। तथापि अप्रत्यक्ष रूप से उन्होंने भविष्य में होने वाले आन्दोलनों के लिए पृष्ठभूमि तैयार की। यदि वे प्रारम्भिक काल में ही पूर्ण स्वतन्त्रता की माँग करने लगते अथवा ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सक्रिय प्रतिरोध की नीति को अपनाते तो सम्भवतया उनके आन्दोलन को शैशवकाल में ही कुचल दिया जाता और स्वतन्त्रता की दिशा में आगामी रणनीति इच्छित रूप में सफल न हो पाती। के०एम० मुंशी के शब्दों में- “यदि पिछले 30 वर्षों में कांग्रेस के रूप में एक अखिल भारतीय संस्था देश के राजनीति क्षेत्र में कार्यरत न होती तो ऐसी अवस्था में गाँधी जी का कोई विस्तृत आन्दोलन सफल न होता।”

(ii) भारतीय परिषद् अधिनियम, 1892 ई०- उदारवादियों की सफलता को 1892 ई० के भारतीय परिषद् अधिनियम के सन्दर्भ में भी लिया जा सकता है। यद्यपि यह भारतीयों को सन्तुष्ट न कर सका, लेकिन फिर भी देश के संवैधानिक विकास की दिशा में यह एक निश्चित प्रगतिशील कदम था।।



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