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उपभोक्तावादी संस्कृति का व्यक्ति विशेष पर क्या प्रभाव पड़ा है ? पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए ।

Answer»

उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव में आकर व्यक्ति आत्मकेंद्रित हो गया है । वह अब दूसरों के सुख-दुख्न के बारे में तनिक भी विचार नहीं करता । केवल अपने सुख-सुविधाओं के विषय में सोचता है । उपभोक्तावादी संस्कृति भोग एवं दिखावा को बढ़ावा देती है । जबकि हमारी अपनी संस्कृति त्याग, परोपकार, भाइचारे, प्रेम को बढ़ावा देती है । नई संस्कृति के प्रभाव के कारण हमारी संस्कृतियों के मूल्यों का धीरे-धीरे विनाश हो रहा है । इस कारण भी व्यक्ति आत्मकेंद्रित होता जा रहा है ।

व्यक्त्ति चाहता है कि वह अपने आप को अत्याधुनिक कहलाए । इस चक्कर में यह अपने आप को औरों से अलग दिखने के लिए कीमती और ब्रांडेड वस्तुओं को खरीदता है । अधिकाधिक सुख के लिए साधनों का उपभोग करना चाहता है । बहुविज्ञापित वस्तुओं के जाल में फँसकर गुणवत्ताहीन वस्तुओं को खरीदने लगा है । महँगी से महँगी वस्तुओं को खरीद कर समाज में अपनी हैसियत जताना चाहता है । यों उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव में आकर व्यक्ति स्वकेंद्रिय व स्वार्थी हो गया है ।



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