Saved Bookmarks
| 1. |
उपयुक्त तुलसीदास- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।। बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोहि।। बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही।। भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्हीं। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।। सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।। मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर। गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।explanation |
| Answer» | |