1.

उस दोहरी प्रक्रिया का वर्णन करें जिसके कारण सामाजिक पर्यावरण का उद्भव होता है?

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सामाजिक पर्यावरण का उद्भव जैव भौतिक पारिस्थितिकी तथा मनुष्य के लिए हस्तक्षेप की अंत:क्रिया के द्वारा होता है। यह प्रक्रिया दोनों ओर से होती है। जिस प्रकार से प्रकृति समाज को आकार देती है, ठीक उसी प्रकार से समाज भी प्रकृति को रूप देता है। उदाहरणार्थ-सिंधु-गंगा के बाढ़ के मैदान की उपजाऊ भूमि गहन कृषि के लिए उपयुक्त है। इसकी उच्च उत्पादन क्षमता के कारण यह घनी आबादी का क्षेत्र बन जाता है। ठीक इसके विपरीत, राजस्थान के मरुस्थल केवल पशुपालकों को सहारा देते हैं जो अपने पशुओं के चारे की खोज में इधर-उधर भटकते रहते हैं। इन उदाहरणों से पता चलता है कि किस प्रकार पारिस्थितिकी मनुष्य के जीवन और उसकी संस्कृति को रूप देती है।

दूसरी ओर, पूँजीवादी सामाजिक संगठनों ने विश्व भर की प्रकृति को आकार दिया है। निजी परिवहन पूँजीवादी वस्तु का एक ऐसा उदाहरण है जिसने जीवन तथा भू-दृश्य को बदला है। नगरों में वायु प्रदूषण तथा जनसंख्या वृद्धि, प्रादेशिक झगड़े, तेल के लिए युद्ध तथा विश्वव्यापी तापमान वृद्धि आदि पर्यावरण पर होने वाले प्रभावों के कुछ उदाहरण हैं। इसीलिए यह माना जाता है कि बढ़ता हुआ मानवीय हस्तक्षेप पर्यावरण को पूरी तरह से बदलने में समर्थ है।



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