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“उसे सन्देह नहीं रहा था।” लहनासिंह को किस बात का सन्देह नहीं रहा और सन्देह कैसे दूर किया?

Answer»

लहनासिंह को निश्चय हो गया लपटन साहब भारतीय अफसर नहीं है। उसने सिगड़ी के उजाले में आगन्तुक का मुंह और बाल देख लिये थे, जो कैदियों की तरह कटे थे। उसने लपटन साहब से कई प्रश्न भी किये । हम हिन्दुस्तान कब लौटेंगे, यहाँ शिकार के मजे नहीं हैं। आप खोते पर सवार हो गए थे। आपका खानसामा मन्दिर में जल चढ़ाने गया था। बहुत बड़ी नील गाय देखी। आपके कन्धे में गोली लगी। इन सारे प्रश्नों के उत्तर सुनकर उसका सन्देह दूर हो गया और यह निश्चय हो गया कि यह जर्मन है। सबसे पहले सिगरेट देने पर ही उसे सन्देह हो गया था।



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