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उसने कहा था’ कहानी की मूल संवेदना क्या है?

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कहानी बड़ी मार्मिक है। कहानी की मूल संवेदना निश्छल प्रेम, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा है। लहनासिंह बचपन में अंकुरित प्रेम के लिए अपने जीवन का उत्सर्ग करता है और जो वचन दिया था उसके लिए त्याग करता है। दूसरी ओर वह एक सिपाही है जिसका लक्ष्य देश की रक्षा करना है। वह अपने कर्तव्य का निर्वाह करता है। जर्मन अधिकारी को मौत के घाट उतार देता है। शरीर में लगे घावों की चिन्ता छोड़कर शत्रुओं का सामना करता है। वह प्रेम और देश दोनों के लिए त्याग करता है और अपने कर्तव्य का निर्वाह करता है। इस प्रकार लहनासिंह का प्रेम, त्याग और कर्तव्यपरायणता ही कहानी की मूल संवेदना है।



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