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“उससे जो कुछ भूल हुई, उसे तुम बड़े होकर क्षमा करो”

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प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है। इसके लेखक मुंशी प्रेमचन्द हैं।
संदर्भ : इस वाक्य को पिता बेनीमाधव सिंह अपने बड़े पुत्र श्रीकंठ से कहते है।
स्पष्टीकरण : लालबिहारी के हाथों अपने स्त्री का अपमान होते देख श्रीकंठ आपे से बाहर हो जाता है। वह अपने पिता बेनीमाधव के सामने अपने क्रोध को प्रकट करता है। बेनीमाधव सिंह अनुभवी आदमी थे। वे इन भावों को ताड़कर अपने बेटे को शांत करने के उद्देश्य से बोलते है कि श्रीकंठ को अपने छोटे भाई को क्षमा करके अपने बड़प्पन का परिचय देना चाहिए।



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