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ऊँचाई की ओर बढ़ते जाने पर लेखिका को परिदृश्य में क्या अंतर नज़र आए? |
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Answer» लेखिका ज्यों-ज्यों ऊँचाई की ओर बढ़ती जा रही थी, त्यों-त्यों- • बाज़ार लोग और बस्तियाँ कम होती जा रही थीं। • चलते-चलते स्वेटर बुनने वाली नेपाली युवतियाँ और कार्टून ढोने वाले बहादुर नेपाली ओझल हो रहे थे। • घाटियों में बने घर ताश के बने घरों की तरह दिख रहे थे। • हिमालय अब अपने विराट रूप एवं वैभव के साथ दिखने लगा था। • रास्ते सँकरे और जलेबी की तरह घुमावदार होते जा रहे थे। • बीच-बीच में रंग-बिरंगे खिले हुए फूल दिख जाते थे। |
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