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वेगनर के महाद्वीपीय सिद्धान्त एवं प्लेट विवर्तनिक सिद्धान्त की तुलनात्मक विवेचना कीजिए। |
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Answer» वास्तव में वेगनर ने अपने सिद्धान्त में युग तथा दिशा को सही ढंग से समझाने का प्रयास नहीं किया है। धरातल पर कई प्रकार के परिवर्तन हुए हैं। पृथ्वी का भू-वैज्ञानिक इतिहास इसका साक्षी है। महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त यद्यपि विभिन्न भूगर्भिक समस्याओं की विवेचना करता है, फलस्वरूप इसे एक अच्छा सिद्धान्त तो माना जाता है, परन्तु इसे सत्य सिद्धान्त नहीं कहा जा सकता है। वेगनर के सिद्धान्त के अनुसार केवल महाद्वीप गतिमान है, सही नहीं है। वास्तव में महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। यह निर्विवाद तथ्य है कि भूवैज्ञानिक इतिहास में सभी प्लेट गतिमान रही हैं और भविष्य में भी गतिमान रहेंगी। विभिन्न कालों में महाद्वीपीय भागों की स्थिति को दर्शाया गया है। पुराचुम्बकीय आँकड़ों के केवल महाद्वीप गतिमान है, सही नहीं है। वास्तव में महाद्वीप एक प्लेट का हिस्सा है और प्लेट गतिमान है। यह निर्विवाद तथ्य है कि भूवैज्ञानिक इतिहास में सभी प्लेट गतिमान रही हैं और भविष्य में भी गतिमान रहेंगी।विभिन्न कालों में महाद्वीपीय भागों की स्थिति को दर्शाया गया है। पुराचुम्बकीय आँकड़ों के आधार पर वैज्ञानिकों ने विभिन्न भूकालों में प्रत्येक महाद्वीपीय खण्ड की अवस्थिति निर्धारित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महाद्वीपीय पिण्ड जो प्लेट के ऊपर स्थित है भू-वैज्ञानिक कालपर्यन्त चलायमान थे और पैंजिया अलग-अलग महाद्वीपीय खण्डों के अभिसरण से बना था, जो कभी एक या किसी दूसरी प्लेट के हिस्से थे। अत: महासागरों एवं महाद्वीपों की उत्पत्ति एवं वर्तमान क्रम महाद्वपीय विस्थापन से नहीं बल्कि प्लेट विवर्तन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप है। |
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