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वह तय करता है कि वह अपनी चिट्ठी सीधे अपने हमनाम डॉ कलाम को दिल्ली जाकर खुद देगा। और वह अकेला ही निकल पड़ता है। रास्ते में मुश्किलें हैं। लेकिन कथा के अंत में कलाम को अपनी मंजिल मिलती है।फ़िल्म के अंत में छोटू उर्फ कलाम का सपना साकार होता है। अपनी सफलता की बात वह अपनी डायरी में लिखता है। संभावित डायरी लिखें।

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20 मई 2019 

आज कैसा दिन रहा ! सालों का मेरा सपना आज पूरा हुआ। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं।हीं स्कूल में मेरी भर्ती हुई। दोस्त रणविजय के साथ मैं भी स्कूल जा रहा हूँ। सारे लोगों ने मुझे चोर बुलाया था। उस दिन मैं कितना रोया था। मुझे लूसी मैडम से मिलने था। इसलिए सीधे दिल्ली गया था। रास्ते में कितनी मुश्किलें सहना पड था। न खाना, न रहन-सहन। संयोग से हुई मुलाकात की वजह से दोस्त रणविजय एवं रिश्तेदारों को मिला। इसलिए आज स्कूल जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आगे मन में यही वादा है खूब पढूँगा और मंज़िल तक पहुँच जाऊँगा। सीधे डॉ. कलाम से मिलूँगा और खूब बातें करेगा। गाँववालों की मदद करूँगा। काश मैं कलाम बन जाएँ.



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