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विभिन्न समूह ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को किस तरह परिभाषित कर रहे थे? ।

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विभिन्न समूह ‘अल्पसख्यक’ शब्द को निम्नलिखित तरह से परिभाषित कर रहे थे

⦁    कुछ लोग मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक कह रहे थे। उनका तर्क था कि मुसलमानों के धर्म, रीति-रिवाज़ आदि हिंदुओं से बिलकुल अलग हैं और वे संख्या में हिंदुओं से कम हैं।

⦁    कुछ लोग दलित वर्ग के लोगों को हिंदुओं से अलग करके देख रहे थे और वह उनके लिए अधिक स्थानों का | आरक्षण चाहते थे।

⦁    कुछ लोग आदिवासियों को मैदानी लोगों से अलग देखकर आदिवासियों को अलग आरक्षण देना चाहते थे।

⦁    लीग के कुछ सदस्य सिख धर्म के अनुयायियों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने और अल्पसंख्यक की सुविधाएँ देने की | माँग कर रहे थे।

⦁    मद्रास के बी. पोकर बहादुर ने अगस्त, 1947 में संविधान सभा में अल्पसंख्यकों को पृथक् निर्वाचिका देने की बजाय संयुक्त निर्वाचिका की वकालत की और कहा-“उसी के भीतर एक ऐसा राजनीतिक ढाँचा बनाया जाए जिसके अंतर्गत अल्पसंख्यक भी जी सकें और अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदायों के बीच मतभेद कम हो।”

⦁    मुसलमान बुद्धिजीवी भी जब पृथक् निर्वाचक की हिमायत करने लगे तो आर० वी० धुलेकर और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे लोगों ने पृथक् निर्वाचिका का विरोध करते हुए जो शब्द कहे, उनका भावार्थ था-अंग्रेज़ तो चले गए, मगर जाते-जाते हिंदू-मुसलमानों में फूट डालकर शरारत का बीज बो गए।

⦁    गोविंद वल्लभ पंत ने संविधान में अल्पसंख्यकों के लिए अलग निर्वाचिका का विरोध करते हुए कहा कि-“मेरा मानना है कि पृथक् निर्वाचिका अल्पसंख्यकों के लिए आत्मघातक साबित होगी।” उन्होंने आगे  कहा-“निष्ठावान नागरिक बनने के लिए सभी लोगों को समुदाय और खुद को बीच में रखकर सोचने की आदत छोड़नी होगी।”

⦁    एन० जी० रंगा ने जवाहर लाल नेहरू द्वारा पेश किए गए उद्देश्य प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के बारे में बहुत बातें हो रही हैं। अल्पसंख्यक कौन हैं? तथाकथित पाकिस्तानी प्रांतों में रहने वाले हिंदू, सिख और यहाँ तक मुसलमान भी अल्पसंख्यक नहीं हैं। जी नहीं, असली अल्पसंख्यक तो इस देश की जनता है। यह जनता इतनी दबी-कुचली और इतनी उत्पीड़ित है कि अभी तक साधारण नागरिक के अधिकारों का लाभ भी नहीं उठा पा रही है।



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