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वीरांगना लक्ष्मीबाई देशभक्ति की एक अद्भुत मिसाल थीं? स्पष्ट कीजिए।

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पाठ का नाम : स्वराज्य की नींव
लेखक : श्री विष्णु प्रभाकर
विधा : एकांकी पाठ

“खूब लडी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” – सुभद्रा कुमारी चौहान जी की यह पंक्ति लक्ष्मीबाई की वीरता को प्रकट करती है। लक्ष्मीबाई ने यह सिद्धकर दिखाया कि अबला हमेशा अबला नहीं रहती। आवश्यकता पड़ने पर वह सबला भी बन सकती है। लक्ष्मीबाई ने सच्चे अर्थों में देश की स्वतंत्रता की नींव रखी थी। देश के प्रति उनकी कर्मपरायणता बहुत अधिक थी।

वह झाँसी को स्वतंत्रता तथा स्वराज्य दिलाने के लिए अंग्रेजी सरकार से बड़ी वीरता के साथ युद्ध करती है। नारी सेना को तैयार करती है। वह झाँसी, कालपी और ग्वालियर के लिए अंग्रेजों से लडती है।

झाँसी लक्ष्मीबाई सेवा, बलिदान और तपस्या की देवी है। वह नूपुरों की झंकार के स्थान पर तोपों का गर्जन सुनना चाहती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वीरांगना लक्ष्मीबाई देश भक्ति की एक अद्भुत मिसाल थी।



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