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विकासशील देशों की विशेषताएँ क्या हैं ?  भारत को छोड़कर विश्व के किसी एक विकासशील देश का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(क) स्थिति तथा (ख) कृषि-विकास।याविकासशील देशों की किन्हीं पाँच विशेषताओं का वर्णन कीजिए।याविकासशील देशों की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।याकिसी एक विकासशील देश का वर्णन कीजिए।

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विकासशील देशों की विशेषताएँ (लक्षण)

जो राष्ट्र आर्थिक विकास की प्रक्रिया में विकसित देशों की तुलना में पिछड़े हुए हैं, विकासशील राष्ट्र कहे जाते हैं। विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ, परन्तु विकास की मन्द गति होने के कारण इन्हें विकासशील राष्ट्र कहा जाता है। विकासशील राष्ट्रों की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं

1. उन्नत कृषि की सम्भावनाएँ – विश्व के लगभग सभी विकासशील देशों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इन देशों में कृषि के विकास की पूरी सम्भावनाएँ हैं। इन देशों में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि उपलब्ध है। तथा कृषि के लिए उपयुक्त जलवायु-दशाएँ पायी जाती हैं। मैदानी भागों में सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं, परन्तु ये राष्ट्र अपने संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाये हैं। इसी कारण इनके विकास की गति धीमी है। अनेक विकासशील देशों में आज भी प्राचीन विधियों तथा यन्त्रों से खेती की जा रही हैं, जिस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा सका है।

2. उद्योगों में कम उत्पादन – विकासशील राष्ट्रों में औद्योगिक उत्पादन भी कम होता है। पूँजी का अभाव, पुरानी उत्पादन विधियाँ, घटिया मशीनें तथा छोटे पैमाने के उद्योग कम उत्पादन का कारण हैं। अशिक्षा, राजनीतिक अस्थिरता तथा निम्नस्तरीय आर्थिक नियोजन भी कम उत्पादन के कारण हैं।

3. अविकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था – परिवहन व्यवस्था पर राष्ट्र का आर्थिक विकास टिका होता है। विकासशील राष्ट्रों में उसका समुचित विकास नहीं हो पाया है। इस प्रकार अविकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था विकासशील राष्ट्रों की मुख्य कमजोरी है। इनके अभाव में कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भली प्रकार नहीं हो पाया है।

4. अल्प-विकसित प्राकृतिक संसाधन विकासशील देशों की प्रमुख समस्या प्राकृतिक संसाधनों का अल्प-विकास है। पूँजी, तकनीक तथा परिवहन के साधनों के अंभाव में यहाँ प्राकृतिक संसाधन अल्प-विकसित अवस्था में पड़े हैं। निरर्थक रूप में पड़े प्राकृतिक संसाधन आर्थिक विकास में सहयोगी नहीं हो पा रहे हैं।

5. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि – सभी विकासशील राष्ट्र जनसंख्या की तीव्र वृद्धि की गम्भीर समस्या से ग्रसित हैं। उत्पादन पर बढ़ती हुई जनसंख्या का दबाव इतना अधिक होता है कि सरकार को बढ़ी हुई जनसंख्या के पोषण के लिए प्रति वर्ष अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। जनसंख्या विस्फोट विकासशील राष्ट्रों की प्रमुख विशेषता है।

6. साक्षरता एवं तकनीकी का निम्न स्तर – विकासशील राष्ट्रों में साक्षरता और तकनीकी का स्तर भी नीचा पाया जाता है। ये राष्ट्र इन क्षेत्रों में प्रगति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।

7. नारी की हीन दशा – विकासशील राष्ट्रों में नारी की हीने स्थिति देखने को मिलती है। अशिक्षा, अज्ञानता, रूढ़ियाँ तथा अधिक बच्चों को जन्म देने के कारण यहाँ नारी की स्थिति खराब है। पुरुष-प्रधान समाज तथा आर्थिक परतन्त्रता ने यहाँ नारी की दशा को और भी बिगाड़ दिया है। धीरे-धीरे नारी को आर्थिक विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है।

भारत और ब्राजील दो विकासशील देशों के उदाहरण हैं। दोनों ही राष्ट्र विकास के स्तर को प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयत्नशील हैं।

मिस्र : एक विकासशील देश के रूप में

स्थितिमिस्र विश्व की आदि सभ्यता वाला अफ्रीका महाद्वीप के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित एक प्रमुख विकासशील देश है। इसका कुल क्षेत्रफल 9,97,667 वर्ग किमी है। मिस्र की राजभाषा अरबी है तथा 94% जनसंख्या मुस्लिम है। मिस्र की जनसंख्या लगभग 5.10 करोड़ है। काहिरा मिस्र की राजधानी है। मिस्र को ‘नील नदी का वरदान कहा जाता है, क्योंकि इस देश की अर्थव्यवस्था में नील नदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

कृषि-विकासमिस्र एक कृषिप्रधान देश है, जहाँ पूर्णतः नील नदी द्वारा सिंचाई के सहारे कृषि फसलों को उत्पादन किया जाता है। नील नदी पर कई स्थानों पर बाँध बनाकर जलविद्युत उत्पादन किया जाता है। राष्ट्रीय आय का 45% भाग कृषि-उत्पादों से प्राप्त होता है। यहाँ की लगभग 50% जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। गेहूं, चावल, मोटे अनाज तथा कपास यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। विश्व में कपास उत्पादन में मिस्र का प्रमुख स्थान है।

खनिज पदार्थों की दृष्टि से मिस्र एक धनी राष्ट्र है। यहाँ लौह-अयस्क, फॉस्फेट, सोना, सल्फेट, मैग्नीशियम, कोयला तथा खनिज तेल के पर्याप्त भण्डार हैं। फलस्वरूप योजनाबद्ध रूप से मिस्र ने अपने संसाधनों का दोहन किया है, इसलिए यहाँ सूती वस्त्र, सीमेण्ट, काँच, रासायनिक उर्वरक, कागज, सिगरेट, पेट्रोलियम परिष्करण, विद्युत उपकरण, चीनी, टायर, रेफ्रीजरेटर, वातानुकूलित उपकरण तथा दूरसंचार के उपकरणों के उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि हुई है। औद्योगीकरण के साथ-साथ यहाँ यातायात के क्षेत्रों में भी तीव्र गति से विकास किया जा रहा है। स्वेज नहर, जो विश्व की सबसे बड़ी जहाजी नहर है, मिस्र के ही अधिकार में है। यह लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है। इस प्रकार मिस्र का स्वेज पत्तन पूर्व से पश्चिम को जोड़ने वाली एक कड़ी के रूप में विकसित हुआ है।



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