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‘विकासशील देशों में आर्थिक विकास की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं।’ इस कथन की व्याख्या कीजिए।

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विकासशील देशों में आर्थिक विकास की सम्भावनाएँ।

आधुनिक विश्व में विकासशील राष्ट्रों के तीव्र आर्थिक विकास की सम्भावनाएँ पहले की अपेक्षा बहुत अधिक हैं। वर्तमान अनुकूल अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए अब अल्प-विकसित राष्ट्रों के लिए विकास-मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करना अत्यन्त कठिन नहीं रहा है। निम्नलिखित तथ्य अल्प-विकसित राष्ट्रों में विकास की प्रबल सम्भावनाओं को प्रकट करते हैं
1. कृषि विकास की सम्भावना – विकासशील देशों में कृषि की उन्नति की पूरी सम्भावनाएँ हैं, क्योंकि, इनमें–

  • विशाल क्षेत्रों में उपजाऊ भूमि उपलब्ध है
  • कृषि के लिए उपयुक्त जलवायु-दशाएँ पायी जाती हैं
  • मैदानी भागों में सिंचाई-सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त जल-साधन उपलब्ध हैं
  • पर्याप्त मात्रा में कृषि श्रम उपलब्ध हैं आदि।

विकासशील देशों में अभी तक समस्त कृषि-योग्य भूमि का उपयोग नहीं हो पाया है। अनेक देशों में लाखों एकड़ भूमि वनों तथा दलदलों से ढकी है और बेकार पड़ी है। इस समस्त भूमि का समुचित उपयोग करके इसे कृषि योग्य बनाया जा सकता है। उन्नत बीज व रासायनिक खाद का प्रयोग, सिंचाई-सुविधाओं में वृद्धि, साख-सुविधाओं में वृद्धि, आधुनिक विधियों तथा कृषि-यन्त्रों का प्रयोग आदि उपायों के द्वारा ये राष्ट्र कृषि के क्षेत्र में तीव्रता से विकास कर सकते हैं।

2. उद्योगों के विकास की सम्भावना – उद्योग-धन्धों का विकास मूलतः खनिज पदार्थों, शक्ति के साधनों, श्रम-शक्ति, पूँजी की उपलब्धता आदि बातों पर निर्भर करता है। अधिकांश विकासशील देश प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से धनी हैं। चीन, भारत, मिस्र तथा ब्राजील में कोयले और लौह-अयस्क के विशाल भण्डार हैं। इराक, ईरान, तुर्की, सऊदी अरब, मिस्र, नाइजीरिया तथा चीन में खनिज तेल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। इन देशों में यदि आधारभूत तथा अन्य उद्योगों का विकास कर लिया जाए तो इनके विकास की गति तीव्र हो सकती है। अब अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। अब ये देश अपने साधनों का योजनाबद्ध ढंग से उपयोग करके तीव्रता से अपना औद्योगिक विकास कर सकते हैं।

3. विकसित राष्ट्रों के अनुभव से शिक्षा – अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस तथा जापान जो आज अत्यधिक विकसित राष्ट्र हैं, भ में अविकसित थे या उनके सामने भी अनगिनत समस्याएँ थीं। अपनी समस्याओं का दृढ़तापूर्वक समाधान करके अब जापान भी विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में सम्मिलित हो गया है। जापान की असाधारण सफलता से शिक्षा ग्रहण करके विकासशील राष्ट्र भी विकास-मार्ग पर तीव्रता से अग्रसर हो सकते हैं।

4. प्राकृतिक संसाधनों का कुशलतम उपयोग – वर्तमान युग में साधनों की बहुलता इतनी अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितना कि उनका समुचित उपयोग। विश्व के कुछ राष्ट्रों ने प्राकृतिक साधनों के अल्प मात्रा में उपलब्ध होने के बावजूद तीव्रता से आर्थिक विकास किया है। जापान तथा इजराइल इसके ज्वलन्त उदाहरण हैं। अधिकांश अल्प-विकसित राष्ट्रों में तो प्राकृतिक साधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिनका कुशलतम उपयोग न कर पाने के कारण ये राष्ट्र अपना समुचित विकास नहीं कर सके हैं। ये राष्ट्र श्रमिकों की कार्यक्षमता में वृद्धि, परिवहन एवं बैंकिंग सुविधाओं का विकास एवं विस्तार तथा तकनीकी ज्ञान में वृद्धि करके प्राकृतिक संसाधनों का समुचित दोहन कर सकते हैं।

5. विदेशी सहायता – आजकल विकसित राष्ट्र अल्प-विकसित राष्ट्रों के विकास हेतु उन्हें पूँजी, तकनीकी ज्ञान, विशेषज्ञों की सेवाएँ आदि के रूप में सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक आदि अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ विकासशील राष्ट्रों को बड़ी मात्रा में ऋण प्रदान कर रही हैं। अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग ने विकासशील देशों की विकास सम्भावनाओं में पर्याप्त वृद्धि कर दी है।



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