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विकासशील देशों में जनसंख्या की समस्या पर एक टिप्पणी लिखिए।

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विकासशील देशों में जनसंख्या की समस्या

अधिकांश विकासशील देशों में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि की समस्या विद्यमान है। जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में चीन का प्रथम तथा भारत का द्वितीय स्थान है। विकासशील देशों में जनसंख्या-वृद्धि की दर 2 से 3% वार्षिक है, जब कि विकसित देशों में वृद्धि-दर केवल 1% ही है। विकासशील देशों में जनसंख्या सम्बन्धी प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं–

1. जनाधिक्य की स्थिति – विकासशील देशों में विश्व की लगभग 67% जनसंख्या निवास करती है। अनेक देशों में जनसंख्या में निरन्तर तीव्र वृद्धि के कारण जनाधिक्य की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। इन देशों में शिक्षा तथा चिकित्सा सुविधाओं में सुधार होने से मृत्यु दर में कमी तथा औसत आयु में वृद्धि हो गयी है, किन्तु जन्म-दर में कोई विशेष कमी नहीं हो पायी हैं। परिणामत: जनसंख्या-वृद्धि की दर बढ़ती गयी है।

2. कार्यशील जनसंख्या का अभाव – अधिकांश विकासशील देशों की समस्त जनसंख्या में 35-40% तक बच्चे हैं, जब कि विकसित देशों में 20-25% ही बच्चे हैं। परिणामतः विकासशील देशों में जनसंख्या का एक बड़ा भाग कार्यशील जनसंख्या पर भार बना हुआ है।

3. भूमि पर भार में वृद्धि – जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण भूमि पर जनसंख्या का भार बढ़ता गया है। परिवार के सदस्यों में वृद्धि से भूमि का उपविभाजन तथा विखण्डन बढ़ता जा रहा है और खेतों का आकार छोटा तथा अनार्थिक होता जा रहा है।

4. जनोपयोगी सेवाओं पर अधिक व्यय – जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण इन देशों की सरकारों को परिवहन, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा, भवन-निर्माण, जल-आपूर्ति आदि जनोपयोगी सेवाओं पर लगातार अधिकाधिक धनराशि व्यय करनी पड़ती है। इससे पूँजी की कमी के कारण विकास-योजनाओं को पूर्ण करने में कठिनाई आती है।

5. बेरोजगारी – जनाधिक्य की स्थिति के कारण अनेक अल्पविकसित देशों में बेरोजगारी तथा अर्द्ध-बेरोजगारी की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है। कृषि में छिपी हुई बेरोजगारी की समस्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

6. निम्न औसत आयु – अधिकांश विकासशील देशों में औसत आयु 35 से 45 वर्ष है, जबकि विकसित देशों में औसत आयु 65 से 75 वर्ष तक है।

7. शहरी जनसंख्या तथा समस्याओं में वृद्धि – जनसंख्या में तीव्र वृद्धि के कारण लोग रोजगार के लिए गाँवों को छोड़कर शहरों में आ रहे हैं, जिससे शहरों की जनसंख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। इससे शहरों में भीड़-भाड़, मकानों की कमी, गन्दगी व प्रदूषण, गन्दी बस्तियों में वृद्धि, अपराधों में वृद्धि आदि समस्याएँ तथा बुराइयाँ बढ़ती जा रही हैं।



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