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विकासशील देशों में उन्नत कृषि की सम्भावनाओं पर विचार प्रकट कीजिए।

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विकासशील देशों में उन्नत कृषि की सम्भावनाएँ

विश्व के लगभग सभी विकासशील देशों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। इन देशों की लगभग 60% जनसंख्या कृषि-कार्यों में संलग्न है, किन्तु फिर भी इन देशों में कृषि पिछड़ी हुई अवस्था में है। इन देशों में कृषि के विकास की पूरी सम्भावनाएँ हैं; जैसा कि निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट है

  1. इन देशों में बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि उपलब्ध है।
  2. कृषि के लिए उपयुक्त जलवायु-दशाएँ पायी जाती हैं।
  3. मैदानी भागों में सिंचाई-सुविधाओं में वृद्धि की पर्याप्त सम्भावनाएँ हैं, क्योंकि ये राष्ट्र अपने जल-साधनों का समुचित उपयोग नहीं कर पाये हैं।
  4. इन देशों में प्रचुर मात्रा में कृषि श्रम उपलब्ध है।
  5. अनेक देशों में लाखों एकड़ भूमि वनों तथा दलदल से ढकी है। आधुनिक वैज्ञानिक विधियों द्वारा इस भूमि को कृषि-योग्य बनाया जा सकता है।
  6. विकसित देशों में कृषि का यन्त्रीकरण किया जा चुका है तथा कृषि-उत्पादन व्यापारिक आधार पर किया जाता है। इसके विपरीत, विकासशील देशों में जीवन-निर्वाह के आधार पर खेती की जाती है।
  7. अनेक विकासशील देशों में आज भी प्राचीन विधियों तथा यन्त्रों से खेती की जा रही है, जिस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं किया जा सका है।

विकासशील राष्ट्र निम्नलिखित उपायों के द्वारा अपने कृषि व्यवसाय का विकास करके इसे उन्नत स्वरूप प्रदान कर सकते हैं

  1. सिंचाई-सुविधाओं का विकास तथा विस्तार किया जाए।
  2. उन्नत बीजों तथा रासायनिक खाद का प्रयोग किया जाए।
  3. किसानों को कृषि की आधुनिक विधियों का ज्ञान कराया जाए।
  4. सरकार तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा किसानों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  5. भूमि-सुधारों को भली-भाँति लागू किया जाए।
  6. भूमि-कटाव को रोकने के लिए गम्भीर प्रयास किये जाएँ।
  7. बेकार पड़ी भूमि को कृषि-योग्य बनाया जाए।
  8. पौध संरक्षण पर समुचित ध्यान दिया जाए।
  9. कृषि-उपज की बिक्री व्यवस्था में सुधार किया जाए।
  10. व्यापारिक आधार पर बागानी कृषि की जाए।


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