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विलासिता की सामग्रियों से बाज़ार भरा पड़ा है, जो आपको लुभाने की जी तोड़ कोशिश में निरंतर लगी रहती हैं । दैनिक जीवन में काम आनेवाली वस्तुओं को ही लीजिए । टूथ-पेस्ट चाहिए ? यह दाँतों को मोती जैसा चमकीला बनाता है, यह मुँह की दुर्गंध हटाता है । यह मसूड़ों को मजबूत करता है और यह ‘पूर्ण सुरक्षा’ देता है । वह सब करके जो तीन-चार पेस्ट अलग-अलग करते हैं, किसी पेस्ट का ‘मैजिक’ फ़ार्मूला है । कोई बबूल या नीम के गुणों से भरपूर है, कोई ऋषि-मुनियों द्वारा स्वीकृत तथा मान्य वनस्पति और खनिज तत्त्वों के मिश्रण से बना है । जो चाहे चुन लीजिए । यदि पेस्ट अच्छा है तो ब्रुश भी अच्छा होना चाहिए । आकार, रंग, बनावट, पहुँच और सफ़ाई की क्षमता में अलग-अलग, एक से बढ़कर एक । मुँह की दुर्गध से बचने के लिए माउथ वाश भी चाहिए ।1. आज का बाजार किन चीजों से भरा है ? ये किनको लुभाती हैं ?2. उपभोक्ताबाद ने हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित किया है ?3. टूथपेस्ट के विज्ञापनों का क्या आधार है ?4. ‘दुर्गध’ और ‘मजबूत’ शब्द का विलोम शब्द लिखिए ।

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1. आज का बाजार विलासिता की सामग्रियों से भरा पड़ा है, वे हमें अर्थात् ग्राहकों को विज्ञापनों से लुभाने की कोशिश में लगी । रहती हैं।

2. उपभोक्तावाद ने हमारे जीवन को अत्यन्त गहराई से प्रभावित किया है । जो वस्तुएँ विज्ञापनों में दिखाई जाती हैं, हम उन्हें खरीदकर लाते हैं और उसका उपभोग करते हैं । भले ही उन वस्तुओं की गुणवत्ता ठीक न हो ।

3. टूथपेस्ट के विज्ञापनों में कई तरह के आधार हैं । कोई टूथपेस्ट दाँतों को चमकीला बनाता है, तो कोई मुँह की दुर्गध मिटाता है, कोई मसूड़ों को मजबूत करता है, कोई बबूल या नीम के गुणों से भरपूर है ।

4. दुर्गध × सुगंध
मजबूत × कमजोर

साबुन ही देखिए । एक में हलकी खुशबू है, दूसरे में तेज़ । एक दिनभर आपके शरीर को तरोताजा रखता है, दूसरा पसीना । रोकता है, तीसरा जर्स से आपकी रक्षा करता है । यह लीजिए सिने स्टार्स के सौंदर्य का रहस्य, उनका मनपसंद साबुन । सच्चाई का अर्थ समझना चाहते हैं, यह लीजिए । शरीर को पवित्र रखना चाहते हैं, यह लीजिए शुद्ध गंगाजल में बनी साबुन ।



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