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विष्णु प्रभाकर की एकांकी का शीर्षक ‘स्वराज्य की नींव’ क्यों रखा गया होगा?

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सन् सत्तावन के समय भारत देश पर अंग्रेज़ों का शासन रहा था। अंग्रेज़ लोग भारत के सभी प्रांतों पर आक्रमण कर रहे थे। लक्ष्मीबाई झांसी की रानी थी। अंग्रेज़ लोग झांसी को भी अपने वश करने युद्ध कर रहे थे। बाबा गंगादास, लक्ष्मीबाई से कहते हैं कि स्वराज्य प्राप्त करने के लिए सभी भारतवासी अपनी विलासिता को छोड़कर जन सेवक बनना है। स्वराज्य की प्राप्ति से उत्तम है स्वराज्य की स्थापना के लिए भूमि तैयार करना हर एक को स्वराज्य की नींव का पत्थर बनना है। इसका अर्थ है सब लोगों में स्वराज्य प्राप्ति की इच्छा होनी चाहिए। नींव के पत्थर बनने से कोई नहीं रोक सकते हैं। यह सब का अधिकार है। इसी आशय पर जोर देते इस एकांकी का शीर्षक ” स्वराज्य की नींव रखा होगा।



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