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वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण |

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विज्ञान और तकनिकी क्षेत्र में परिवर्तन होने से उद्योग-धन्धों का विकास बढ़ा, जिससे उनकी दीर्घकालीन पूँजी की आवश्यकताएँ भी बढ़ी । व्यक्तिगत निवेशक और व्यापारिक बैंक इन आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं कर सकती । जिससे दीर्घकालीन पूँजी की आवश्यकताओं . को पूरा करने के लिए देश में विशिष्ट वित्तीय संस्थाओं की आवश्यकता उत्पन्न हुई ।

भारत में स्वतंत्रता के पश्चात् पंचवर्षीय योजनाओं के आरम्भ होने से औद्योगिक विकास पर बल दिया गया । सार्वजनिक क्षेत्र तथा निजीक्षेत्र से स्थापित होनेवाले उद्योगों को दीर्घकालीन पूँजी प्राप्त हो इस उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की गई । इसके साथ-साथ छोटे और मध्यम आकार की इकाईयों को वित्तीय सहायता प्राप्त हो इस उद्देश्य से राज्य वित्त निगमों की स्थापना की गई ।

दीर्घकालीन उधार पूँजी प्रदान करनेवाली अमुक मुख्य वित्तीय संस्थाएँ निम्नानुसार है :

  1. भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (IFCI – Industrial Finance Corporation of India)
  2. भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI – Industrial Development Bank of India)
  3. भारतीय औद्योगिक शाख और विनियोग निगम (ICICI – Industrial Credit and Investment Corporation of India) (4) गुजरात राज्य वित्त निगम (GSFC – Gujarat State Finance Corporation)
  4. गुजरात औद्योगिक विनियोग निगम (GIIC – Gujarat Industrial Investment Corporation)


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