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Vrind Ka Doha in hindi​

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करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान।।अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिये दौर।तेते पाँव पसारिये, जेती लाँबी सौर।।विद्या धन उद्यम बिना, कहौ जु पावै कौन।बिना झुलाए ना मिलै, ज्यौं पंखा का पौन।बात कहन की रीति में, है अंतर अधिकाय।एक वचन तैं रिस बढ़ै, एक वचन तैं जाय।।भेष बनावै सूर कौ, कायर सूर न होय।खाल उढ़ावै सिंह की, स्यार सिंह नहिं होय।।धन अरु गेंद जु खेल को दोऊ एक सुभाय।कर में आवत छिन में, छिन में करते जाय।।धन अरु गेंद जु खेल को दोऊ एक सुभाय।कर में आवत छिन में, छिन में करते जाय।।अंतर अंगुरी चार को, सांच झूठ में होय।सब माने देखी कही, सुनी न माने कोय।।Explanation: HOPE it HELP ...PLZ.. MARK me as a BRAINLIST..



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